घने जंगल के बीचों बीच एक नदी बहती थी। वहां एक छोटा सा हाथी अपने बड़े से परिवार के साथ रहता था। उसका नाम मोजो था। सबका प्यारा, सबका दुलारा मोजो बहुत शरारती था.
एक दिन बारिश के बाद बहुत अच्छी धूप निकली थी। मोजो पेड़ों के बीच मस्ती में घूम रहा था. मोजो ने एक नन्हे जिराफ़ को देखा। उसकी गर्दन लंबी, पतली थी और आँखें शरारती भूरी । जिराफ़ अपनी गर्दन से एक ऊँचे पेड़ से पत्तियाँ तोड़ने का प्रयास कर रहा था. मोजो भी उसके पास आकर खेलने लगा। छोटे जिराफ़ का नाम जोजो था। थोड़ी देर में दोनों दोस्त बन गए।
दोनों दोस्त जंगल में खूब मस्ती करते थे। वे पेड़ों पर चढ़ते, फुटबॉल खेलते और बहुत सारी शरारतें करते थे। उन्होंने एक गाना बनाया -
मैं हूं मोजो, यह है जोजो,
खूब हमारी जोड़ी,
दुनिया की परवाह नहीं हमें,
करें मस्ती थोड़ी-थोड़ी
वे दोनों सारा दिन ये गाना गाते और खूब शरारतें करते। सब जानवर उन्हें बच्चा समझकर उनकी छोटी-छोटी शरारतों को अनदेखा कर देते थे। पर अब उनकी शैतानियों से आसपास के जानवर परेशान होने लगे थे।
एक दिन उन्होंने एक चिड़िया के घोंसले को देखा। चिड़िया ने बहुत मेहनत से अपना घर बनाया था। जोजो ने अपनी लंबी गर्दन से पेड़ की डाली को पकड़कर हिला दिया और मोजो ने पेड़ को। घोंसला हिलने लगा। चिड़िया के बच्चे डर गए और चीं-चीं करने लगे।
एक दिन एक बूढ़ा खरगोश पेड़ के नीचे सो रहा था। जोजो ने मोजो को इशारा किया। मोजो अपनी सूंड में पानी भर लाया और सोते हुए खरगोश पर डाल दिया। खरगोश डर के मारे उछल पड़ा! जोजो और मोजो को बहुत हंसी आई।
छोटे जानवरों को तो वे कुछ समझते ही नहीं थे। कभी कछुए की चाल का मजाक उड़ाते तो कभी चूहे को पैर के नीचे कुचलने का प्रयास करते।
अब उन दोनों की शिकायतें उनकी माँओं तक पहुंचने लगी थीं। मोजो की मां ने उन दोनों को समझाया, 'मोजो, जोजो, जंगल हम सब का घर है. यह हम सब यहाँ एक दूसरे की मदद से रहते हैं। तुम दोनों ऐसे ही सबको तंग करोगे तो एक दिन मुश्किल में फसोगे।'
एक दिन, मोजो और जोजो ने सोचा कि क्यों न नदी के ठंडे पानी में खेला जाए। उनकी मां ने उन्हें सख्त हिदायत दी थी कि अकेले नदी की ओर न जाना, लेकिन दोनों एक दिन दोपहर में सबसे छिपकर नदी के किनारे पहुँच गए। मोजो ने सूंड मैं पानी भरकर जोजो पर फेंका। जोजो भी उसके पीछे भागा। पानी में उछल-कूद करते हुए दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था। वे नदी में आगे बढ़ते गए।
मैं हूं मोजो, यह है जोजो,
खूब हमारी जोड़ी,
दुनिया की परवाह नहीं हमें,
करें मस्ती थोड़ी-थोड़ी
पेड़ पर बैठी मैना बड़े ध्यान से दोनों बच्चों को खेलते हुए देख रही थी। अचानक पानी में कुछ हलचल हुई। मैना समझ गई कि नदी में रहने वाला दुष्ट मगरमच्छ बच्चों का शिकार करने वाला है। उसने शोर मचाना शुरू किया तो मोजो का ध्यान मगरमच्छ की ओर गया। वह बहुत घबरा गया। उसकी सूंड में पानी भरा था। उसने पानी मगरमच्छ की आँखों में फेंका। जोजो ने भी सब देखा। दोनों भागकर नदी से निकल आए। वे बहुत डर गए थे। उन्होंने ऊपर बैठी मैना को देखा और जान बचने के लिए धन्यवाद दिया।
अंधेरा होने लगा था। कुछ दूर जाकर जोजो ने कहा, "मोजो, लगता है हम रास्ता भूल गए हैं! रात होने लगी है, रात में मुझे तो ज्यादा दिखाई भी नहीं देता। अब क्या करेंगे? मां कहती है कि शेर रात में ही शिकार पर निकलता है!"
मोजो ने कहा, "हां! इसीलिए मां हम छोटे बच्चों को बड़ों के बीच में ही रखती है क्योंकि शेर तो हमें आसानी से पकड़ सकता है!" मोजो-जोजो चलते-चलते थक चुके थे। उन्हें बहुत डर लग रहा था। भूख भी लगी थी।
पेड़ की डाल पर बैठे बंदर मामा ने उन्हें देखा तो नीचे आए और पूछा, "क्या हुआ बच्चो? अकेले रात को कैसे घूम रहे हो?"
जोजो ने कहा, "मामू, हम रास्ता भूल गए हैं। भूख भी लग रही है!"
बंदर झटपट केले के पेड़ पर चढ़ा और दोनों को एक-एक गुच्छा केले खाने को दिए। फिर उन्होंने पेड़ के नीचे बिल में बैठे खरगोश को आवाज दी। खरगोश बहुत होशियार था। वह जंगल के सब रास्तों को पहचानता था। बिल से बाहर निकला तो झट से उसने मोजो और जोजो को पहचान लिया। कहा, "अरे तुम तो वही शैतान हो ना जिन्होंने मुझ पर उस दिन पानी डाला था!"
जोजो और मोजो के सिर शर्म से झुक गए थे। वे मुंह लटकाकर खड़े हो गए। उन्हें लगा कि अब खरगोश उनकी मदद नहीं करेगा।
बूढ़ा खरगोश बोला, "अरे कोई बात नहीं बच्चो! उदास मत हो! मैं तुम्हें घर पहुंचाता हूं। मेरे पीछे पीछे चलो!" बंदर मामा पेड़ों पर चलो और मैं नीचे। ध्यान रखना शेर या कोई खतरनाक जानवर दिखे तो आवाज़ निकालकर हमें सावधान कर देना!" बंदर और खरगोश दोनों उछलते-कूदते बंदर मोजो और जोजो को उनके घर तक ले गए।
उधर पेड़ के नीचे हाथी और जिराफ चिंता में खड़े थे। वे जंगल में उन्हें ढूंढ़ने निकलने ही वाले थे कि उन्होंने दोनों को खरगोश और बंदर के साथ आते देखा। उन्हें सुरक्षित देखकर सबके चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई।
अब मोजो और जोजो समझ चुके थे कि बिना बात दूसरों को तंग नही करना चाहिए। ईश्वर ने यदि हमें कुछ विशेष दिया है तो उसका प्रयोग सही तरीके से करना ज़रूरी है। कोई छोटा या बड़ा नहीं होता, सबका अपना रोल है। एक दूसरे की मदद से ही हम सुरक्षित रह सकते हैं।
अब मोजो और जोजो सबके साथ प्यार से रहते। जंगल के छोटे-बड़े सभी जानवरों का सम्मान करते। मां की बात मानते और किसी को परेशान नहीं करते थे। उनकी इस जोड़ी से जंगल के जानवर भी बहुत प्यार करते थे। अब वे गाते --
मैं हूं मोजो यह है जोजो,
दोनों पक्के यार
.
हम करते बड़ो का आदर,
और छोटों से प्यार।
सीख लिया अब हमने जीवन का ये सार,
एक दूसरे की मदद से ही यारो चलता ये संसार।।



